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465+ Best Mood Off Shayari In Hindi |  मूड ऑफ स्टेटस

निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़ !!
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो !!

मुझसे दुरिया बनाकर तो देखो !!
फिर पता चलेगा कितना नजदीक हू में !!

सुकून ए दिल को नसीब तेरी बेरुखी ही सही !!
हमारे दरमियाँ कुछ तो रहेगा चाहे वो फ़ासला ही सही !!

कब वो सुनता है कहानी मेरी !!
और फिर वो भी ज़बानी मेरी !!

बे-ख़ुदी ले गई कहाँ हम को !!
देर से इंतिज़ार है अपना !!

ज़िंदगी में तो वो महफ़िल से उठा देते थे !!
देखूँ अब मर गए पर कौन उठाता है मुझे !!

रिश्तों में इतनी बेरुख़ी भी अच्छी नहीं हुज़ूर !!
देखना कहीं मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे !!

जिंदगी क्यो इतनी बरुखी कर रही है !!
हम कोैन सा यहा बार-बार आने वाले है !!

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी !!
फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी !!

अब शायद उसे किसी से मुहब्बत ज़ुरुर हो !!
मैं छीन लाया हूँ उस से उम्र भर की बेरुख़ी !!
कहाँ तलाश करोगे तुम दिल हम जैसा !!
जो तुम्हारी बेरुखी भी सहे और प्यार भी करे !!

Mood Off Shayari In Hindi

वो हमसे खफा बैठे हैं क्योंकि गलती !!
से वो किसी ओर की बातो में आ बैठे है !!

अब शिकायत क्या कर उनकी बेरुखी पर !!
शायद कभी उनको हम से प्यार ही ना था !!

तेरी बेरुखी ने ये क्या कर दिया है !!
भीड़ में होते हुऐ भी तनहा कर दीया है !!

रिश्ता हम दोनो का जिंदगी भर निभाऊंगा !!
तेरी बेरुखी को मैं प्यार से तोड़ दूंगा !!

ये शाम भी आज बेरुख सी दिख रही है !!
तेरी आंखों में भी उदासी दिख रही है !!

ऐ वक़्त जरा सुन तो, आ बैठ ना मेरे पास !!
एक-एक कप चाय पी कर गिला-शिकवा भुलाते हैं !!

कभी तो साथ बैठो, ज़िन्दगी रिलैक्स हो जाये !!
क्यों ना एक कप चाय और कुछ स्नैक्स हो जाये !!

उदास कयो होता है ऐ दिल उनकी बेरुखी पर !!
वो तो बङे लोग है अपनी मर्जी से याद करते है !!

सोचते है सीख ले हम भी बेरुखी करना !!
प्यार निभाते-२ अपनी ही कदर खो दी हमने !!

अब गिला क्या करना उनकी बेरुखी का !!
दिल ही तो था भर गया होगा !!

कहाँ तलाश करोगे तुम दिल हम जैसा !!
जो तुम्हारी बेरुखी भी सहे और प्यार भी करे !!

सालभर तेरी बेरूखी से कत्ल होते रहे हैं हम !!
अब तो तहरीरें बन गई है उदासियाँ गुजरे साल की !!

बहुत बेरुखी से पेश आता है दिल खुद से !!
कि अब प्यार भरी बातों की आदत नहीं रही !!

इस बेरूखी पे आपकी यूं आ गई हंसी !!
आंखें बता रही हैं ज़रा सी हया तो है !!
उनकी बेरुखी ने बतलाया अब वो मेरे नहीं रहे !!
जिनकी खातिर हमने क्या-क्या सितम नहीं सहे !!

बेरुखी की आदत जिन्हें होती है !!
अक्सर दुनिया उनसे रूठी होती है !!

ऐसी भी क्या बेरुखी, जो मैं तेरा अपना ना रहा !!
तेरे इश्क में मैंने क्या-क्या दर्द ना सहा !!

तेरी बेरुखी एक दिन मुझसे तुझसे दूर कर देगी !!
तेरी बेरुखी मुझे तेरे बिना जीने पर मजबूर कर देगी !!

चार पैसे कमाते हीं लोग बेरुखी से पेश आने लगते हैं !!
पैसे से खरीद लेंगे हर चीज, यह जताने लगते हैं !!

जब से उसने बेरुखी का हुनर सीखा है !!
वो मेरा नहीं अब और किसी का है !!

मुझे देखकर उसने नजर फेर ली !!
बेरुखी की हद इससे ज्यादा क्या होगी !!

बेरुखी की आदत जिसे हो जाती है !!
अच्छाई-बुराई उसे नजर नहीं आती है !!

उसकी बेरुखी ने मुझे उसका असली चेहरा दिखाया !!
जिसके लिए हमने क्या-क्या नहीं गंवाया !!

तुम्हारी बेरुखी ने हमें पत्थर बना डाला !!
कमाया प्यार कम, सब कुछ गंवा डाला !!

वक्त भी था, मौका भी था और तन्हाई भी !!
लेकिन बेरुखी उसकी बरकरार रही मेरे प्रति !!

बेरुखी से पेश आया करो खुदगर्ज लोगों से !!
क्योंकि हर किसी के आगे झुकना अच्छा नहीं होता !!

तेरी बेरुखी ने दिल को बंजर बना दिया !!
वरना कभी मेरा दिल भी गुलजार हुआ करता था !!

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Mood Off Shayari

उसकी बेरुखी को मेरी ग़ैरत ने कुछ यूं संभाला !!
कि मुस्कुरा के मैं खुद मोहब्बत से मुकर गया !!

उनकी बेरुखी ने हमें इतना सताया है !!
की हर दिन हमने अपना तन्हा ही बिताया है !!
तुम्हारी बेरूखी के बाद खुद से भी बेरूखी सी हो गई !!
मैं जिन्दगी से और जिन्दगी मुझसे अजनबी सी हो गई !!

आदत हमारी कुछ इस तरह हो गई !!
उनकी बेरूखी से भी मुहब्बत हो गई !!

बहुत दर्द होता है जब आपको वो इंसान इग्नोर करें !!
जिसके लिए आप पूरी दुनिया को इग्नोर करते हैं !!

अब गिला क्या करना उनकी बेरुखी का !!
दिल ही तो था भर गया होगा !!

उदास कयोँ होता है ऐ दिल उनकी बेरुखी पर !!
वो तो बङे लोग है अपनी मर्जी से याद करते है !!

बहुत बेरुखी से पेश आता है दिल खुद से !!
कि अब प्यार भरी बातों की आदत नहीं रही !!

इस बेरूखी पे आपकी यूं आ गई हंसी !!
आंखें बता रही हैं ज़रा सी हया तो है !!

जो मेरी हो नहीं सकती, वो खुद की भी क्या होगी !!
मेरी इस बेरुखी को, वो समझती भी क्या होगी !!

तेरी दुनिया से जाऊंगा, तुझे मैं भूल जाऊंगा !!
तेरी हर कसमे वादों को, मैं खुद ही निभाऊंगा !!

सोचते हे सीख ले हम भी बेरुखी करना !!
प्यार निभाते-२ अपनी ही कदर खो दी हमने !!

जो लोग बेरुखी से पेश आते हैं सभी से !!
उनसे लोग दूर हो जाते हैं धीरे से !!

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरूखी तेरी !!
फिर भी बेइम्तहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी !!

पहले सी बात न थी, इश्क अब फीका था !!
अभी-अभी उन्होंने नजरअंदाजी का हुनर सीखा था !!

सुकून-ए-दिल को नसीब तेरी बेरुखी ही सही !!
हमारे दरमियाँ कुछ तो रहेगा चाहे फ़ासला ही सही !!

काश तुझे मेरी जरूरत हो मेरी तरह !!
और मैं तुझे नज़रअंदाज करूँ तेरी तरह !!
इतनी बेरुखी दिखा कर के तुझे क्या मिलेगा !!
क्या तू रब है जो मरने के बाद मिलेगा !!

कहाँ तलाश करोगे तुम दिल हम जैसा !!
जो तुम्हारी बेरुखी भी सहे और प्यार भी करे !!

तूँ माने या ना माने पर दिल दुखा तो है !!
तेरी बेरुखी से कुछ गलत हुआ तो है !!

मुझसे दुरिया बनाकर तो देखो !!
फिर पता चलेगा कितना नजदीक हू में !!

चाहते थे हम आपके अल्फाज बनना !!
पर आपने तो हमारी बेरुखी चुन ली !!

देखी है बेरुखी की आज हम ने इन्तेहाँ !!
हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए !!

इस बेरूखी पे आपकी यूं आ गई हंसी !!
आंखें बता रही हैं ज़रा सी हया तो है !!

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 मूड ऑफ स्टेटस

हज़ार शिकवे कई दिनों की बेरूखी !!
बस उनकी एक हँसी और सब रफा-दफा !!

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी !!
फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी !!

इस क़दर जले है तुम्हारी बेरुख़ी से !!
के अब आग से भी सुकून सा मिलने लगा है !!

हजारों जवाब से अच्छी मेरी ख़ामोशी !!
न जाने कितने सवालों की आबरू रख ली !!

तेरी ये बेरूखी किस काम की रह जायेगी !!
आ गया जिस रोज अपने दिल को समझाना मुझे !!

तूँ माने या ना माने पर दिल दुखा तो है !!
तेरी बेरुखी से कुछ गलत हुआ तो है !!

डर तो उसे भी होगा बिछुड़ने का मुझसे !!
मेरी बेरुख़ी से वो सहम क्यों नही जाता !!

ये तो अच्छा है कि दिल सिर्फ सुनता है !!
अगर कहीं बोलता होता तो क़यामत आजाती !!
अब इश्क में बेरुखी न दे मुझको !!
बेहद गुम़ा रहा है तेरे इश्क पे मुझको !!

इन बादलो का मिजाज मेरे महबूब सा है !!
कभी टूट कर बरसते है कभी बेरुखी से गुजर जाते हैं !!

अब शायद उसे किसी से मुहब्बत ज़ुरुर हो !!
मैं छीन लाया हूँ उस से उम्र भर की बेरुख़ी !!

तेरी सादगी का कमाल है मै इनायत समझ !!
बैठा तेरी बेरुखी भी चुप सी है मै मुहब्बत समझ बैठा !!

जिंदगी क्यो इतनी बेरुखी कर रही है !!
हम कौन सा यहा बार-बार आने वाले है !!

तेरी बेरुखी मेरी आदतों में शामिल है !!
तू मोहब्बत से पेश आये तो अजीब लगताहै !!

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Mood off status

तुम्हारी बेरुखी के बाद खुद से भी बेरुखी सी हो गई !!
मैं जिंदगी से और जिंदगी मुझसे अजनबी सी हो गई !!

रिश्तों में इतनी बेरुख़ी भी अच्छी नहीं हुज़ूर !!
देखना कहीं मनाने वाला ही ना रूठ जाए तुमसे !!

उसकी बेरूखी ने छीन ली मेरी शरारतें !!
लोग समझते है सुधर गया हूँ मैं !!

खत भ…
दो चार लफ्ज प्यार के लेके मैं क्या करू !!
देनी है तो वफ़ा की मुकम्मल किताब दे !!

ज़रा तल्ख़ लहज़े में बात कर ज़रा बेरुख़ी से पेश आ !!
मैं इसी नज़र से तबाह हुआ हू मुझे देख न यूँ प्यार से !!

मेरी खामोशियां गुस्सा बहुत भरा पड़ा !!
है दिमाग में इश्क जो बेहिसाब करता हूं उससे !!

चुपके से हम ने भेजा था एक गुलाब उसे !!
खुशबू ने सारे शहर मैं तमाशा बना दिया !!

हासिल-ए-इश्क़ के बारे में, सोंचता हूँ जब !!
भी तेरा मिलना याद आता है, तेरी बेरुखी नहीं !!

तू हमसे चाँद इतनी बेरुखी से बात करता !!
है हम अपनी झील में एक चाँद उतरा छोड़ आए हैं !!

हमारी चाहत को आपने हमारी !!
बेरुखी बना दी क्या भूल थी !!
हमारी जो आपने यह सजा दे दी !!

हमारी बेरुखी अब इस कदर बढ़ गई है !!
तुमसे बात तो मुमकिन है !!
पर हम कोशिश नहीं करना चाहते !!

तेरी बेरुखी ने छीन ली है !!
शरारतें मेरी और लोग समझते हैं !!
कि मैं सुधर गया हूँ !!

जब-जब मुझे लगा मैं तेरे लिए खास हूँ !!
तेरी बेरुखी ने ये समझा दिया !!
मैं झूठी आस में हूँ !!

तुम्हारी बेरूखी ने लाज रख ली !!
बादाखाने की, तुम आंखों से पिला !!
देते तो पैमाने कहाँ जाते !!

कुछ बेरुखी से ही सही !!
पर देखते तो हो ये आपकी !!
नफरत है कि एहसान आपका !!

भरी सख्ती मिजाज़ों में नहीं पैदायशी !!
हैं हम किसी की बेरूखी झेली पिघल !!
के फिर जमे हैं हम !!

कभी ऐसी भी बेरुखी देखी है तुमने ए दिल !!
लोग आप से तुम तुम से जान !!
और जान से अनजान हो जाते हैं !!

शिकायत न करना किसी से बेरुखी !!
की इंसान की फितरत ही होती है !!
जो चीज़ पास हो उसकी कद्र नही करता !!
रहने दे अभी गुंजाइशें जरा अपनी !!
बेरुखी में इतना ना तोड़ मुझे कि !!
मैं किसी और से जुड़ जाऊँ !!

तू हमसे चाँद इतनी बेरुखी से बात करता !!
है हम अपनी झील में एक चाँद उतरा !!
छोड़ आए हैं !!

लोगो की बेरुखी देखकर तो अब !!
हम खुश होते है,आँसु तो तब आते है !!
जब कोइ प्यार के दो लफ्ज कहता है !!

तेरी बेरुखी में बहका हूं ना होश है !!
आज भी मुझे रख दे दिल पर हाथ !!
ज़रा पहचान जाऊं तुझे !!

सिखा दी बेरुखी भी ज़ालिम ज़माने ने !!
तुम्हें कि तुम जो सीख लेते हो हम पर !!
आज़माते हो !!

मुख्तसर सी दिल्लगी से तो तेरी बेरुखी !!
अच्छी थी कम से कम ज़िंदा तो थे एक !!
कश्मकश के साथ !!

सोचते है सीख ले हम भी बेरुखी करना !!
सब से,सब को महोब्बत देते देते हमने !!
अपनी क़दर खो दी है !!

तेरी ये बेरुखी हमसे देखी नहीं जाएगी !!
अगर ऐसा ही चलता रहा तो कसम से !!
इस दिल की धड़कने ज्यादा दिन तक धड़क पाएंगी !!

इस दिल को आखिरकार कुछ तो मिला !!
तेरी महोब्बत ना सही लेकिन तेरी !!
बेरुखी का हिस्सा तो बना !!

तेरी बेरुखी ने छीन ली है !!
शरारतें मेरी और लोग समझते हैं !!
कि मैं सुधर गया हूँ !!

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Sad mood off

शिकायत न करना किसी से बेरुखी की !!
इंसान की फितरत ही होती है !!
जो चीज़ पास हो उसकी कद्र नही करता !!

बेरुखी जहाँ हो वहाँ प्यार बिल्कुल नहीं होता !!
क्योंकि अपनेपन के बिना !!
कोई रिश्ता, रिश्ता नहीं होता !!

तेरी ये अदा ये बेरुखी उम्र भर याद रहेगी मुझे !!
तू बेवफा निकली !!
इसलिए किसी और से वफा की तलाश रहेगी मुझे !!

इस दिल को आखिरकार कुछ तो मिला !!
तेरी महोब्बत ना सही लेकिन तेरी !!
बेरुखी का हिस्सा तो बना !!

तेरी यादो का सिलसिला कभी ख़त्म ना होगा !!
तेरे जाने के बाद अब इस दिल को !!
फिर किसी से इश्क़ ना होगा !!
वो रूठे है हमसे कुछ ऐसे !!
की अब दोबारा नहीं मिलना !!
चाहते वो हमसे !!

बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरूखी तेरी !!
फिर भी बेइम्तहा तुझे !!
चाहने की बेबसी मेरी !!

जख्म तो कई दिए जिंदगी ने मुझे !!
लेकिन उतना दर्द ना हुआ जितना !!
दर्द तेरी बेरुखी ने दिया !!

उनकी बेरुखी का यारो अब !!
गिला क्या करना !!
दिल ही तो हे भर गया होगा !!

हम यूँ अपनी जिंदगी से मिले !!
अजनबी जैसे अजनबी से मिले !!
हर वफ़ा एक जुर्म हो गया !!
हर दोस्त कुछ ऐसी बेरुखी से मिले !!

मतलब क्या हुआ बेरूखी का !!
है कौन मुजरिम तेरी इस ख़ुशी का !!
उम्मीद थी जिस से प्यार की ऐ खुदा !!
बुझ गया वो चिराग कभी का !!

दिल तोड़कर हमारा तुमको राहत भी ना मिलेगी !!
हमारे जैसी तुमको चाहत भी न मिलेगी !!
यूँ इतनी बेरुखी ना दिखलाइये हमपर !!
हम अगर रूठे तो हमारी आहट भी ना मिलेगी !!

प्यार उनका हमसे भुलाया ना गया !!
उनके बाद कभी हमसे मुस्कुराया ना गया !!
उनकी तो बेरुखी में भी वो ऐडा थी ज़ालिम !!
की बेवफ़ा का इलज़ाम भी उनपे लगाया ना गया !!

काश वह समझते इस दिल की तड़प को !!
तो यूँ रुसवा ना किया होता !!
उनकी ये बेरूखी भी मंजूर थी हमें !!
बस एक बार हमें समझ लिया होता !!

तेरी दुनिया में मुझे एक पल दे दे !!
मेरी बेरुखी ज़िन्दगी का गुज़रा हुआ कल दे दे !!
वो वक्त जो गुज़ारा था साथ तेरे !!
अब उन्हें भूल पाऊं ऐसा कोई हल दे दे !!

कभी ऐसी भी बेरूखी देखी है हमने !!
कि लोग आप से तुम तक !!
और तुम से जान तक !!
फिर जान से अनजान तक हो जाते हैं !!

कब तक रह पाओगे आखिर यूँ दूर हम से !!
मिलना पड़ेगा आखिर कभी जरूर हम से !!
नजरें चुराने वाले ये बेरूखी है कैसी !!
कह दो अगर हुआ है कोई कसूर हम से !!

देख कर बेरूखी उनकी इस कदर आज !!
ना जाने क्यों आँखें हमारी नम हो गई !!
दरवाजें तो पहले ही बंद हो गये थे उनके !!
मगर अब तो खिड़कियाँ भी बंद हो गई !!

तेरी बेरूखी को भी रूतबा दिया हमने !!
प्यार का हर फ़र्ज अदा किया हमने !!
मत सोच कि हम भूल गयें है तुझे !!
आज भी खुदा से पहले तुझे याद किया हमने !!

Mood off quotes

जब जब मुझे लगा !!
मैं तेरे लिए ख़ास हूँ !!
तेरी बेरुखी ने ये समझा दिया !!
मैं झूठी आस में हूँ !!
अभी कमजोर हूँ !!
तो कमजोर ही रहने दो !!
यूँ बेरुखी से तो !!
मैं भी पत्थर हो जाऊँगा !!

उदास कयो होता है ऐ दिल !!
उनकी बेरुखी पर !!
वो तो बङे लोग है !!
अपनी मर्जी से याद करते है !!

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो !!
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो !!
निगाहें बेरुखी हैं और तीखे हैं लफ्ज़ !!
ये कैसी मोहब्बत हैं जो तुम मुझसे करते हो !!

पहाड़ियों की तरह खामोश है !!
आज के संबंध और रिश्ते !!
जब तक हम न पुकारे !!
उधर से आवाज ही नहीं आती !!

सुकून ए दिल को नसीब !!
तेरी बेरुखी ही सही !!
हमारे दरमियाँ कुछ तो रहेगा !!
चाहे वो फ़ासला ही सही !!

कुछ बेरुखी से ही सही !!
पर देखते तो हो !!
ये आपकी नफरत है कि !!
एहसान आपका !!

कोई अनजान नहीं होता अपनी !!
बेरूखी और खताओं से !!
बस हौसला नहीं होता खुद को !!
कटघरे में लाने का !!

आज देखी है हमनें भी !!
बेरुखी की इन्तेहाँ !!
हम पर नजर पड़ी तो !!
वो महफ़िल से उठ गए !!

उनका गुरूर कम पड जाए ऐ-खुदा !!
मुझे मेरे इश्क़ में इतना गुरूर दे !!
वो नाम भी ले मेरा तो कदम लड़खड़ाये !!
ऐ-खुदा, बेरुखी में उसे ऐसा सुरूर !!

तेरी बेरूखी ने ये क्या सिला दिया मुझे !!
ज़हर गम-ए-जुदाई का पिला दिया मुझे !!
बहुत रोया बहुत तड़पा कई रातों तक मैं !!
पर तुमने एक कतरा भी आँसू नहीं दिया मुझे !!

सुकून ए दिल को नसीब !!
तेरी बेरुखी ही सही !!
हमारे दरमियाँ कुछ तो रहेगा !!
चाहे वो फ़ासला ही सही !!

तेरी बेरुखी को भी रुतबा दिया हमने !!
तेरे प्यार का हर क़र्ज़ अदा किया हमने !!
मत सोच के हम भूल गए है तुझे आज !!
भी खुदा से पहले याद किया है तुझे !!

Full mood off

ये तेरी बेरुख़ी की हम से आदत ख़ास !!
टूटेगी, कोई दरिया न ये समझे कि मेरी !!
प्यास टूटेगी,तेरे वादे का तू जाने मेरा !!
वो ही इरादा है, कि जिस दिन साँस टूटेगी !!
उसी दिन आस टूटेगी !!

कोई रिश्ता जो न होता तो !!
तूं खफा भी न होता !!
फिर भी न जाने क्यों येँ बेरुखी !!
तेरी महोब्बत का पता देती हैं !!

तेरी बेरुखी है तो क्या हुआ !!
तेरी यादों का रुख आज भी मेरी तरफ !!
ही है जब भी तन्हा देखती है मुझे !!
अपना समझकर बहलाने चली आती है !!
इरादों में अभी भी क्यों इतनी जान बाकी !!
है, तेरे किये वादों का इम्तिहान अभी बाकी !!
है,अधूरी क्यों रह गयी तुम्हारी यह बेरुखी !!
अभी दिल के हर टुकड़े में तेरा नाम बाकीहै !!

तेरी बेरुखी दिल को घायल कर देती है !!
भीड़ में होकर भी तनहा कर देती है !!
किस बात से हो घुसा जरा बता दिजिए हमें !!
तेरी बेरूखी रातों की नींद उड़ा ले जाती है !!

तेरी बेरूखी के बाद !!
खुद से नफ़रत सी हो गई है !!
ये भीड़ भरी दुनियां !!
अजनबी सी हो गई है !!

इश्क में कभी बेरूखी ना हो !!
कभी किसी में दूरियां ना हो !!
बड़ता रहे प्यार दोनो में इस कदर !!
के जिंदगी भर दोनों एक साथ हो !!

तेरी बेरुखी अकसर उलझन दे जाती है !!
ना जाने कितने सवाल दे जाती है !!
नींद नहीं आती है रातों में हमे !!
करवट बदलते हुए बेरूखी की वजह ढूंढी जाती है !!

अगर बेरुखी है मुझ से !!
तो उसकी वजह तो बता !!
ये तेरा उदास चेहरा !!
अच्छा नहीं लगता !!

तेरी बेरुखी से अच्छी !!
तेरी बातें होती है !!
तेरे उदास होंठों की चुपी !!
मेरी जान ले लेती है।

तू वक्त नहीं देती थीं !!
हम उसे तेरी बेरुखी समझ बैठे !!
तुम किसी और को देती थीं वक्त !!
और हम तेरे वापस आने की आस लगा बैठे !!

यू चुप ना बैठा करो !!
इतनी बेरुखी भी ठीक नहीं !!
तुम जब भी लड़ती हो मुझ से !!
तेरी आंखों में प्यार नज़र आता है !!

उनकी बेरुखी देख कर !!
हम खुद में गलती ढूंढने लगे !!
हम उसे मनाने की कोशिश में थे !!
वो किसी और से दिल लगाने लगे !!

कोई हकीम का नुस्खा !!
कोई तोड़ नहीं मिल रहा है !!
उनकी बेरुखी का मुझे !!
कोई इलाज़ नहीं मिल रहा है !!

अब अपनी बेरुखी का दर्द !!
हम किसको सुनाए !!
हमारे जिंदगी में नहीं है कोई !!
अब हम किसको मनाए !!

Mood off love

दूर जाकर हम से सुकुन कहा पाओगे !!
रात दिन यूंही तड़पते रहे जाओगे !!
अपनी बेरुखी इस तरह ना दिखाया करो !!
वरना हमे देखने को तरस जाओगे !!

तुमने हम से बात करना छोड़ दिया !!
इतनी बेरुखी भी ठीक नहीं !!
अब हम आपकी एक झलक भी ना देख पाए !!
अब इतनी भी नाराज़गी ठीक नहीं !!

तुम्हारी बेरुखी को हम !!
प्यार में बदल देंगे !!
तेरी मुसकुराहट के लिए !!
हम कुछ भी कर लेंगे !!
गलतियां करती हो खुद !!
खुद ही बेरुखी दिखाते हो !!
इल्जाम हम पर लगाकर !!
खुद शरीफ़ बन जाते हो !!

तुम्हारी बेरुखी को देख कर !!
चेहरा मेरा उदास होता है !!
तेरी मुस्कान देखने को !!
दिल मेरा तरस जाता है !!

प्यास वो दिल कि बुझाने कभी आया भी नहीं !!
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं !!
बेरुखी इससे बड़ी और भला क्या होगी !!
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं !!

दिल तोड़कर हमारा तुमको राहत ना मिलेगी !!
हमारे जैसी तुमको चाहत ना मिलेगी !!
यूँ इतनी बेरुखी ना दिखाया करो हमसे !!
वरना कभी हमारी आहट भी ना मिलेगी !!

वफ़ा के बदले बेवफाई ना दिया करो !!
मेरी उम्मीद ठुकरा कर इंकार ना किया करो !!
तेरी मोहब्बत में हम सब कुछ खो बैठे !!
जान चली जायेगी इम्तिहान ना लिया करो !!

तेरी बेरुखी को भी रुतबा दिया हमने !!
प्यार का हर फ़र्ज़ अदा किया हमने !!
मत सोच कि हम भूल गए है तुझे !!
आज भी खुदा से पहले तुझे याद किया हमने !!

आखिर क्यों मुझे तुम इतना दर्द देते हो !!
जब भी मन में आये क्यों रुला देते हो !!
निगाहें बेरुखी है और तीखे है लफ्ज !!
ये कैसी मोहब्बत है जो तुम मुझसे करते हो !!

जख्मो पर नमक भी छिड़क कर देखा !!
तेरी बेरुखी ज्यादा दर्द देती हे !!
कैसा बादल हे जिसका कोई साया भी नहीं !!
प्यास वो दिल की कभी बुझाने आया भी नहीं !!
बेरुखी इससे बड़ी भला क्या होंगी !!
एक मद्त से हमें उसने सताया भी नहीं !!

देखो ये बेरुखी प्यार की अदाएं !!
बेक़रार दिल को और बेक़रार करती है !!
हसरतों के दीप जल तो रहें हैं !!
मचलने को रोशनी, तेरा इंतज़ार करती है !!

हमारी चाहत को आपने !!
हमारी बेरुखी बना दी !!
क्या भूल थी हमारी !!
जो आपने यह सजा दे दी !!

हमारा खामोश रहना !!
आपको पसंद आ गया !!
शायद आपकी मोहब्बत !!
हमारी बेरुखी से थी !!

हमारी बेरुखी अब !!
इस कदर बढ़ गई है !!
तुमसे बात तो मुमकिन है !!
पर हम कोशिश नहीं करना चाहते !!

हमें खामोश कर गई !!
आपकी बेरुखी !!
अब तो अल्फाज भी !!
खामोशी में तब्दील हो गए !!

तेरी बेरूखी ने ये क्या सिला दिया मुझे !!
ज़हर गम-ए-जुदाई का पिला दिया मुझे !!
बहुत रोया बहुत तड़पा कई रातों तक मैं !!
पर तुमने एक कतरा भी आँसू नहीं दिया मुझे !!

कभी ऐसी भी बेरुखी देखी है तू ने !!
ऐ मेरे प्यारा सा दिल !!
लोग अक्सर आप से तुम, तुम से जान !!
और जान से अनजान हो जाते हैं !!

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